देश में चावल की खेती अनुमान से पहले ही शुरू हो गयी थी

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भारत में चावल की खेती अब तक माने जा रहे समय से भी बहुत पहले से ही रही है | प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता के स्थानों पर नए शोध में पता चला है कि देश के मुख्य फसलों कि पैदावार चीन के साथ ही शुरू हो गयी थी | शोध में इस बात कि भी पुष्टि हुई है कि सिंधु घाटी सभ्यता के लोगो ने सबसे पहले गर्मी औए सर्दी दोनों मौसमो में विविध फसलों की खेती शुरू की गयी थी | गर्मिओ में यहाँ चावल, बाजरा और सेम पैदा की जाती थी | और सर्दियों में गेहूं, जौ और दालो की पैदावार होती थी | दोनों फसलों के लिए पानी की अलग – अलग मात्राओ की जरुरत होती है |

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# शोध के अनुसार क्षेत्रीय कृषको का एक नेटवर्क प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता के बाजारों में मिश्रित उपज की आपूर्ति करता था | कांस्य युग के दौरान यह सभ्यता पाकिस्तान से लेकर भारत के उत्तर पश्चिम क्षेत्र तक फैली हुई थी | गंगा के मध्य तराई क्षेत्र के लहुरादेव के इलाके में चावल के प्रयोग के प्रमाण मिले, जबकि लंबे समय से यह मन जाता था कि ये कृषि विधियां सभ्यता के अंत तक दक्षिण एशिया तक नहीं पहुंच सकी | और करीब 2000 ईसापूर्व में चीन से यह विधि यहाँ आयी |

# चावल के सबसे पहले इस्तेमाल के प्रमाण मध्य गंगा बेसिन के लहुरादेवा क्षेत्र में मिले है | लंबे समय तक यह मन जाता रहा है कि सिंधु घाटी सभ्यता के अंत तक दक्षिण एशिया में चावल की खेती नहीं होती थी | ताजा शोध के मुताबिक, दक्षिण एशिया में इससे करीब 430 साल पहले ही चावल की खेती के प्रमाण मिले है | शोधकर्ताओं में उत्तर प्रदेश के बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय और ब्रिटेन की ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता शामिल थे |

# उत्तर प्रदेश के बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय और ब्रिटेन के ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता को करीब 430 साल पहले दक्षिण एशिया में इस फसल के पहुंचने के प्रमाण मिले है | ब्रिटेन के केम्ब्रिज विश्वविद्यालय के जेनिफर बेट्स ने बताया कि हमें पूरी तरह से प्राचीन दक्षिण एशिया में अलग प्रक्रिया के तहत खेती के प्रमाण मिले है | अनुमान है कि जंगली जनजाति ओरयाजा निवारा इस तरह की खेती करते थे | उन्होंने बताया कि आर्द्र और सुखी भूमि पर धान कि फसल पैदावार होने से यहाँ के विकास में मदद मिली | यह चीन में धान की पैदावार करने से करीब 2000 ईसापूर्व पहले ही यहाँ पहुंच गयी थी |

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